टॉपर्स कोई सुपरह्यूमन नहीं होते। वे भी वही इंसान होते हैं, वही फोन, वही ऐप्स, वही घबराहट लेकिन फर्क होता है उनके माइंडसेट में।
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डिस्ट्रेक्शन की पहचान सबसे पहला कदम है
“टॉपर्स सबसे पहले यह पहचानते हैं कि क्या चीज़ उन्हें Distract कर रही है। क्या यह मोबाइल है, सोशल मीडिया है या अंदर का कोई डर? जब कारण स्पष्ट हो जाता है, तभी समाधान संभव होता है।”
- टॉपर्स अपनी ऊर्जा का प्रबंधन करते हैं, न कि सिर्फ समय का
“ज्यादातर टॉपर्स दिन के उस समय पढ़ाई करते हैं जब उनकी ऊर्जा सबसे ज़्यादा होती है, जैसे सुबह का समय। इससे वे कम समय में ज़्यादा फोकस के साथ काम कर पाते हैं और डिस्ट्रैक्शन कम होता है।”
- सोशल मीडिया को ब्लॉक नहीं करते, मैनेज करते हैं
“एक अच्छा स्टडी प्लान उन ऐप्स के लिए सीमित समय तय करता है। कुछ ऐप्स जैसे Forest, StayFocused, या Freedom का उपयोग करके टॉपर्स खुद को नियंत्रित करते हैं। वे सोशल मीडिया को ‘ब्रेक’ की तरह इस्तेमाल करते हैं, न कि ‘एस्केप’ की तरह।”
- सेल्फ डाउट को जर्नलिंग और माइक्रो टारगेट्स से तोड़ा जाता है
“मैं टॉपर्स को सलाह देता हूँ कि वे एक डेली जर्नल रखें जिसमें वे रोज़ एक उपलब्धि लिखें, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो। साथ ही, टारगेट्स को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटने से विश्वास बना रहता है।”
- टॉपर्स इनर डायलॉग पर काम करते हैं
“सेल्फ डाउट को कंट्रोल करने के लिए टॉपर्स अपना 'इनर वॉइस' यानी आंतरिक संवाद मजबूत करते हैं। मैं उन्हें 'सकारात्मक स्व-प्रवचन' (Positive Self-talk) की ट्रेनिंग देता हूँ, जैसे 'मैं तैयारी कर रहा हूँ, मैं लगातार बेहतर हो रहा हूँ।'”
- रूटीन और रिवॉर्ड सिस्टम के ज़रिए ध्यान बनाए रखते हैं
“टॉपर्स के पास एक स्पष्ट रूटीन होता है। साथ ही वे खुद को रिवॉर्ड भी देते हैं, जैसे, 'अगर मैंने 3 घंटे पढ़ लिया तो 20 मिनट की वॉक या फेवरेट शो'। इससे ब्रेन को पॉजिटिव एसोसिएशन मिलती है।”
- टॉपर्स 'डिजिटल मिनिमलिज़्म' को अपनाते हैं
“मैं छात्रों को सिखाता हूँ कि वे अपने फोन को कैसे टूल की तरह इस्तेमाल करें, न कि टाइमपास की तरह। होम स्क्रीन से सोशल मीडिया ऐप्स हटा देना, या फोन को ग्रेस्केल मोड पर रखना, ये सब तकनीकी उपाय होते हैं।”
- "टॉपर्स तुलना नहीं करते, ट्रैक करते हैं"
“सेल्फ डाउट तब आता है जब हम दूसरों से तुलना करते हैं। लेकिन टॉपर्स अपनी प्रगति को ट्रैक करते हैं एक डायरी या स्टडी एप्स में। इससे वे अपने ही पिछले वर्ज़न से बेहतर बनने पर फोकस रखते हैं।”
इसी उद्देश्य से Disha Publication आपके लिए सरल भाषा में, सुरुचिपूर्ण तीन पुस्तकें लेकर आया है –
भगवद्गीता: रोचक कहानियों के साथ – यह पुस्तक छोटे-छोटे अध्यायों और रोचक प्रसंगों में विभाजित है, ताकि विद्यार्थी भी आत्मा और कर्म के सिद्धांतों को सहजता से समझ सकें।
रामायण: फॉर यंग माइंडस – यह जीवनमूल्यों और आदर्शों की कथा-आधारित प्रस्तुति है, जो हर उम्र के पाठकों को जोड़ती है।
वेद और उपनिषद: विद्यार्थियों के लिए – इसमें जटिल विचारों को सरल कहानियों के ज़रिए प्रस्तुत किया गया है, जिससे गहराई भी बनी रहे और रुचि भी।
इन पुस्तकों के ज़रिए हम न केवल ज्ञान की ओर लौटते हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक चेतना को भी फिर से जीवित करते हैं।
अब समय, केवल आगे बढ़ने का नहीं – अपनी जड़ों की ओर लौटने का भी है।